चलो साथियों तुम्हें दिखाऊँ, झांकी पच्चीस साल की
किये हैं जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की
(कोरस)
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
अपने सुखमय जीवन का मैं, सार तुम्हें बतलाता हूँ
कैसे टेंशन फ्री रहता हूँ, ये सब कुछ समझाता हूँ
रोज़ सुबह मैं चाय बनाकर, बिस्तर पर पहुँचाता हूँ
फिर चरणों में शीश झुकाकर, प्यार से उसे जगाता हूँ
सुख से यूं बस कटी ज़िंदगी, मुझ जैसे खुशहाल की
कि ये है जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की
(कोरस)
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
प्यार वो मुझसे करती है और, मैं भी उससे करता हूँ
वो भी मुझपे मरती है और, मैं भी उसपे मरता हूँ
जान उसकी न्यौछावर मुझपे, मैं भी सेम ही करता हूँ
पर वो मुझसे ना डरती है, और मैं उससे डरता हूँ
शेर को बकरी बना के रखने, वाले हर एक कमाल की
कि ये है जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की
(कोरस)
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
सर्दी के मौसम में जब भी, देर से घर को आता हूँ
आ जाए भूकंप धरा पर, कुछ ऐसे गुर्राता हूँ
अपनी बीवी को जमकर के, फिर फटकार लगाता हूँ
फौरन ही बर्तन धोने को, पानी गरम मैं पाता हूँ
साले-सालियों की जय बोलूँ, जय बोलूँ ससुराल की
कि ये हैं जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की
(कोरस)
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...
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