Friday, July 24, 2026

💐💐 बेटा 💐💐

दुनियां में अगर बेटों का उदाहरण दिया जाता है तो पहले श्रवण कुमार जो अपने माता पिता को काँवर में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर ले गए थे, और दूसरे भगवान राम जिन्होंने पिता का वचन निभाने के लिए राजपाट का त्याग कर वनवास चुना ।

मगर इन दोनों ही बेटों के जीवन का नकारात्मक पक्ष यह था कि श्रवण कुमार के वियोग में उनके माता पिता के प्राण गए और भगवान राम के वियोग में उनके पिता राजा दशरथ के प्राण गए।

सो मेरे विचार से वो बेटा भी बहुत अच्छा है जो सदा आपका साथ निभाये। 

मेरी दो अलग अलग कैंसरों की सर्जरी के समय मेरे परिवार द्वारा की गई सेवा मुझे मृत्यु के द्वार से वापस ले आई। सो मेरे हिसाब से तो बेटा ऐसा होना चाहिए जो आपको यमद्वार से वापस ले आए। न कि ऐसा कि जिसके वियोग में प्राण चले जाएं ।

इसी सेवाभाव से प्रेरित होकर मैने यह कविता लिखी है🙏🙏



नहीं चाहिये राम कोई

ना कोई श्रवण कुमार मुझे

जो बेटा है बस वो ही

देना भगवन हर बार मुझे


वात्सल्य की पराकाष्ठा

थे पर बड़े अभागे थे

जिनके दुख में पिता ने जिनके

प्राण स्वयं के  त्यागे थे


छोड़ जाये मझधार में जो

ना चहिये वोअवतार मुझे

जो बेटा है बस वो ही

देना भगवन हर बार मुझे


DushYant

Sunday, June 14, 2026

🌹 बेटी 🌹

उनके लिए जो कहते हैं बेटी पराया धन है, अपने घर में मेहमान होती है, उसका कन्यादान किया जाता है...  

मै कन्यादान शब्द के खिलाफ हूं। मै बेटी के स्वतंत्र अस्तित्व का समर्थन करता हूं 

मेरे विचार से मां बाप का कर्तव्य सिर्फ बेटी के विवाह तक सीमित नहीं होता 🙏🙏


बेटी है तू मालिक है

अपने घर  में मेहमान नहीं

हां ख़ुद का अस्तित्व है तेरा 

दान का तू सामान नहीं


अंत समय तक साथ निभाने

वाला कोई प्रण है तू

मां बापू की जान है तू तो

नहीं पराया धन है तू


मान बढ़ाना सबका पर

खुद भी सहना अपमान नहीं

हां खुद का अस्तित्व है तेरा

दान का तू सामान नहीं


जल्दी जल्दी के चक्कर में 

बाद में मन ना पछताये 

गलत निर्णयों से अच्छा है

सही देर से हो जाये


शान से ब्याह करूंगा तेरा

कोई कन्या-दान नहीं

हां खुद का अस्तित्व है तेरा

दान का तू सामान नहीं


DushYant

Friday, April 3, 2026

💐शादी की पच्चीसवीं सालगिरह💐 💐25th wedding anniversary💐

 

​चलो साथियों तुम्हें दिखाऊँ, झांकी पच्चीस साल की

किये हैं जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की

(कोरस)

​छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...

छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...

​अपने सुखमय जीवन का मैं, सार तुम्हें बतलाता हूँ

कैसे टेंशन फ्री रहता हूँ, ये सब कुछ समझाता हूँ

रोज़ सुबह मैं चाय बनाकर, बिस्तर पर पहुँचाता हूँ

फिर चरणों में शीश झुकाकर, प्यार से उसे जगाता हूँ

सुख से यूं बस कटी ज़िंदगी, मुझ जैसे खुशहाल की

कि ये है जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की

(कोरस)

छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...

छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...

​प्यार वो मुझसे करती है और, मैं भी उससे करता हूँ

वो भी मुझपे मरती है और, मैं भी उसपे मरता हूँ

जान उसकी न्यौछावर मुझपे, मैं भी सेम ही करता हूँ

पर वो मुझसे ना डरती है, और मैं उससे डरता हूँ

शेर को बकरी बना के रखने, वाले हर एक कमाल की

कि ये है जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की

(कोरस)

छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...

छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...

​सर्दी के मौसम में जब भी, देर से घर को आता हूँ

आ जाए भूकंप धरा पर, कुछ ऐसे गुर्राता हूँ

अपनी बीवी को जमकर के, फिर फटकार लगाता हूँ

फौरन ही बर्तन धोने को, पानी गरम मैं पाता हूँ

साले-सालियों की जय बोलूँ, जय बोलूँ ससुराल की

कि ये हैं जो बीवी ने मेरी, ऐसे हर एक बवाल की

(कोरस)

छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...

छोडूंगी न सनम, तुमको सातों जनम...