दुनियां में अगर बेटों का उदाहरण दिया जाता है तो पहले श्रवण कुमार जो अपने माता पिता को काँवर में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर ले गए थे, और दूसरे भगवान राम जिन्होंने पिता का वचन निभाने के लिए राजपाट का त्याग कर वनवास चुना ।
मगर इन दोनों ही बेटों के जीवन का नकारात्मक पक्ष यह था कि श्रवण कुमार के वियोग में उनके माता पिता के प्राण गए और भगवान राम के वियोग में उनके पिता राजा दशरथ के प्राण गए।
सो मेरे विचार से वो बेटा भी बहुत अच्छा है जो सदा आपका साथ निभाये।
मेरी दो अलग अलग कैंसरों की सर्जरी के समय मेरे परिवार द्वारा की गई सेवा मुझे मृत्यु के द्वार से वापस ले आई। सो मेरे हिसाब से तो बेटा ऐसा होना चाहिए जो आपको यमद्वार से वापस ले आए। न कि ऐसा कि जिसके वियोग में प्राण चले जाएं ।
इसी सेवाभाव से प्रेरित होकर मैने यह कविता लिखी है🙏🙏
नहीं चाहिये राम कोई
ना कोई श्रवण कुमार मुझे
जो बेटा है बस वो ही
देना भगवन हर बार मुझे
वात्सल्य की पराकाष्ठा
थे पर बड़े अभागे थे
जिनके दुख में पिता ने जिनके
प्राण स्वयं के त्यागे थे
छोड़ जाये मझधार में जो
ना चहिये वोअवतार मुझे
जो बेटा है बस वो ही
देना भगवन हर बार मुझे
DushYant
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