Wednesday, February 3, 2010

ये इस्क नहीं आसान डियर

ये इस्क नहीं आसान डियर
तगड़े-तगड़े इसमें हैं फ़ियर
बहुतै टेन्सन करवावत है
बिन बात के ये पिटवावत है
कुछ अनुभव आज सुनाइब हम
डाइरेक्ट फ़िलिम दिखवाइब हम
इक दिन हम कालेज जात रहैं
कुछ मन ही मन मुसकात रहैं
मोटरसाइकिल कावासाकी
हम करत रहैं ताका झाँकी
इक सुन्दर कन्या ताड़ लिये
दोनो आँखें फ़ुल फ़ाड़ लिये
वो लट झटकावत आवत थी
चंचल नैना मटकावत थी
वो चपल चंचला सी बाला
बच्चन की थी फ़ुल मधुशाला
हम हू स्टाइल मार दिये
स्पीड की सीमा पार किये
स्टन्ट सभी हम झोंक दिये
खम्भे मा बाइक ठोंक दिये
वो कहाँ गयी ना जान पडे़
बस हम गोबर मा आन पडे़
टूटी हड्डी टूटे थे गियर
ये इस्क नहीं आसान डियर

Saturday, November 28, 2009

CHALAN

लुट पिट हार - छोङ घर औ व्यापार
हम भरन चालान आज न्यायालय आ गये
पर लुटी मौज देख वकीलों की फौज
जैसे कई भस्मासुर आज धरती पे छा गये

कोई कहे बेल होगी कोई कहे जेल होगी
बचने को हमसा वकील कर लीजिये
चाहते बचानी जान कहना ये लीजे मान
ढाई लाख लगेंगे अपील कर लीजिये

इतना डराया हमें, इतना सताया हमें
हम घबरा गये, पसीने से नहा गये
घर औ दुकान कर वकीलों के नाम
हम छोङ के सामान सब हॉस्पिटल आ गये

फिर ले चालान चले कोर्ट में वकील
पेश की ऐसी दलील के हिसाब कर लीजिये
बन्दा है गरीब, पङा मौत के क़रीब
फूटा इसका नसीब, इसे माफ कर दीजिये.....

Monday, May 11, 2009

please join a new community on orkut
ONLY BAKWAS n enjoy the bakwas
http://www.orkut.co.in/Main#Community.aspx?cmm=87451766

Tuesday, February 10, 2009

VALENTINE DAY

कहते हैं इश्क़ तो बन्धन है जन्मों जन्मों का
एक दिन में सभी जनम वो निभा लेते हैं
नुमाइश कर के चन्द लमहों की
इस तरह जश्ने मुहब्बत वो मना लेते हैं

बेज़ुबाँ इश्क़ जो अन्धा भी है और पागल भी
ऐसे मासूम को कैसी ये सज़ा देते हैं
पाक सी चीज़ जो खुदा से मिलती जुलती थी
करके नापाक उसे सङकों पे ला देते हैं

महँगे तोहफों से तौल कर दिल को
प्यार की बोलियाँ वो खूब लगा लेते हैं
भूख और प्यास ना समझे जो नाम पर उसके
भूखी नज़रों से हरेक प्यास बुझा लेते हैं

इस तरहा जश्ने मुहब्बत वो मना लेते हैं.....

Sunday, October 5, 2008

साथी वापस आ जाओ SAATHI WAPAS A JAO

कौन है अच्छा कौन बुरा है,
इन बातों पे मत जाओ
सूना है घर बिना तुम्हारे,
साथी वापस आ जाओ
घर मे सबकी जगह बराबर,
ये घर सदा तुम्हारा है
तुमको वापस आना होगा,
अगर ये तुमको प्यारा है
इस जहाज़ के हम सब पंछी,
अपना यहीं बसेरा है
डर है कहीं तुम खो ना जाओ,
छाया घोर अन्धेरा है
मरघट सा छाया सन्नाटा,
अमन का ये पैग़ाम नही
बेमतलब जो हुई लङाई,
क्रान्ति भी उसका नाम नहीं
हम भी ज़िद्दी, तुम भी ज़िद्दी,
अब इस ज़िद पर मत जाओ
सूना है घर बिना तुम्हारे,
साथी वापस आ जाओ

Saturday, September 27, 2008

असली आतंकवादी ASALI AATANKWAADI

बाँटती आतंकियों को कानूनी मदद और
अगले धमाके का जो करे इन्तज़ार है
कोई मरे कोई जिये,इसे कोई फर्क नहीं
असली आतंकवादी,खुद सरकार है

मरें जो हज़ारों इन्हें कोई भी शरम नही
हत्यारों के लिये सिर्फ मानवाधिकार है
कहते कङाई से मुक़ाबला करेंगे हम
पर कुछ ना करें,धिक्कार है धिक्कार है

भूल के जो बलिदान, संसद के शहीदों का
आतंकी को फाँसी ना दो हो रही गुहार है
मेडल वापस लेते आई ना शरम हाय
प्रजातंत्र का ये सरे आम बलात्कार है