कारगिल युद्ध मे शहीद जो जवान हुए
उनको नमन कर धन्य यह देश हुआ
गोलियों की बरिशों मे विजय का नाद देख
खुशी और गम का अजीब समावेश हुआ
छलनी छाती को लिये, गर्व से तने सरों मे
आगे बढने के लिये और भी आवेश हुआ
म्रत्यु पूर्व भेजते सन्देश देश नायकों को
सीमा लांघने का हमें, क्यूं नहीं आदेश हुआ
शान से वो लङे, देश हित में न्योछारे प्राण
आज लाश उनकी तिरंगा ओढ सो रही
घर से वो चले थे, जो लौट के ना घर आये
उनकी विदाई उनके घरों से हो रही
कांपते दो बूढे हाथ, अर्थी को थाम कर
पूछते हैं बोलो अब हम कहां जायेंगे
बाट जोहती दो अश्रुपूर्ण नन्हीं आंखें पूछें
मम्मी बतलाओ मेरे पापा कब आयेंगे
नयनों मे अग्नि भर्, कांपते अधर लिये
सिंहनी सी बोली माता, तव निज लाल से
वीर तो अमर होते, वीर मरते नहीं हैं
मारते हैं शत्रु को वो, ढूंढ के पाताल से
आज तेरे पिता आके, बस गये तुझमे हैं
तू भी अब शत्रुओं को देश से भगायेगा
पिता के अधूरे स्वप्न तू ही पूरे करेगा रे
कारगिल क्या तू पाकिस्तान जीत लायेगा
देख ऐसी भावनायें, मन यही कहता है
कोई कुर्बानी अब व्यर्थ नहीं जायेगी
अमर रहेंगे सदा देश के शहीद और
कोई विधवा ना अब विधवा कहायेगी
आज़ादी के सूरज की, लालिमा सिन्दूर बन
मांग ऐसी सिंहनी की, सदा ही सजायेगी
विधवा ना नाम देना, कोई इन्हें भूलवश
अमर सुहागन ये सदा ही कहायेंगी
Friday, December 21, 2007
Thursday, December 20, 2007
अपूर्ण कविता
अंकुर सम जन्मे हो तुम,
अब व्रक्ष रूप भी बन जाओगे,
लेकिन जब पतझङ आयेगा
पत्ता-पत्ता झङ जाओगे
जैसे भोर भये दिन चढता
सांझ भये फिर ढल जाता है
जीवन हो तुम एक दिवस के
सांझ के जैसे ढल जाओगे
अब व्रक्ष रूप भी बन जाओगे,
लेकिन जब पतझङ आयेगा
पत्ता-पत्ता झङ जाओगे
जैसे भोर भये दिन चढता
सांझ भये फिर ढल जाता है
जीवन हो तुम एक दिवस के
सांझ के जैसे ढल जाओगे
Tuesday, December 18, 2007
कवि की सरस्वती वन्दना
कवि की सरस्वती वन्दना
ज्ञान की विज्ञान की, जहान की हे बुद्धि देवी
माता शारदे नमन तुझको हज़ार है,
गीत हो या छन्द हो या दोहा हो या श्लोक कोई
सबकी हे स्वामिनी प्रणाम बार बार है
आज दे आशीश ऐसी, कन्ठ हो सुकन्ठ मेरा
वाणी मे हे शरदा नज़र तू ही आये माँ
बाकी सारे कवियों के गले आज बैठ जायें
मेरे सामने कोई कवि ना टिक पाये माँ
मेरे नाम का हो हौवा, वो जो बोलें लगें कौवा
ऐसी कांव कांव सी आवाज़ उन्हें दे दे माँ
मुझे मिलें तालियाँ, बाकी को मिलें गालियाँ
औ मुझे पुष्प हार उनको बुखार दे दे माँ
श्रोता जो ना करे वाह वाह, जले जीभ उसकी
बीच में जो उठे टांग उसकी माँ तोङिये,
तालियाँ बजाये जो ना, दाद खाज खुजली हो,
ऐसे निखट्टू श्रोता को, कभी मत छोङिये
ज्ञान की विज्ञान की, जहान की हे बुद्धि देवी
माता शारदे नमन तुझको हज़ार है,
गीत हो या छन्द हो या दोहा हो या श्लोक कोई
सबकी हे स्वामिनी प्रणाम बार बार है
आज दे आशीश ऐसी, कन्ठ हो सुकन्ठ मेरा
वाणी मे हे शरदा नज़र तू ही आये माँ
बाकी सारे कवियों के गले आज बैठ जायें
मेरे सामने कोई कवि ना टिक पाये माँ
मेरे नाम का हो हौवा, वो जो बोलें लगें कौवा
ऐसी कांव कांव सी आवाज़ उन्हें दे दे माँ
मुझे मिलें तालियाँ, बाकी को मिलें गालियाँ
औ मुझे पुष्प हार उनको बुखार दे दे माँ
श्रोता जो ना करे वाह वाह, जले जीभ उसकी
बीच में जो उठे टांग उसकी माँ तोङिये,
तालियाँ बजाये जो ना, दाद खाज खुजली हो,
ऐसे निखट्टू श्रोता को, कभी मत छोङिये
Thursday, December 13, 2007
कुत्ते के राजनीतिक गुण
अगर है बनना आप को नेता एक महान-कुत्ता बन कर देखिये, एक बार श्रीमान
एक बार श्रीमान, बङे ही निपुण होते हैं-कुत्ते मे नेता के ग्यारह गुण होते हैं
पहला गुण है भौंकना,बिना बात हर रोज़
दूजा गुण है काटना, ज़रा लगे जो चोट, ..................
पौपुलर हो जाओगे-सेफ भी रह पाओगे
तीजा गुण है गली में, रहो आप ही शेर
दूजा नेता आये तो, कर दो उसको ढेर ...................
भौंक के उसे डराओ-दौङ के दूर भगाओ
चौथा गुण है झुन्ड का, चमचे रक्खो साथ
मिले कोई कमज़ोर तो, कर लो दो दो हाथ........
ये चमचे वोट दिलायें-ये चमचे नोट भी लायें
लालच गुण है पाँचवाँ, सदा ये देता साथ
बिस्कुट दे जो आप को, चाटो उसके हाथ .....
काम बनता या ना बनता-फिर भी पुचकारे जनता
छठवाँ गुण है दौङना, हर गाङी के संग
भागेंगे दुश्मन सदा, उङ जायेंगे रंग ................
के दुश्मन डर के रहेंगे-के तुमसे बच के रहेंगे
स्वमिभक्ति गुण सातवां, सबसे यही mahaan.
P.M.तक बन जाओगे, इससे तुम श्रीमान.............
ये भक्ति कर जाओगे-बहुत ऊपर जाओगे
डरना है गुण आठवाँ, चढोगे हरेक पहाङ
खटिया के नीचे घुसो, जब भी सुनो दहाङ ...........
अगर ज़िन्दा ना रहोगे-तो आगे कैसे बढोगे
पूंछ हिलाना गुण नवाँ,पङेगी अच्छी छाप
मन का जब महौल हो, पूंछ हिलाओ आप .............
टिकट भी पा जाओगे-समर्थन भी पाओगे
दसवाँ गुण गुर्राइये, जब भी मूड हो औफ
लोग भगेंगे फालतू, भीङ होयेगी साफ ...........
मुफ्त मे काम ना करना-बस अपनी जेबें भरना
पागलपन गुण ग्यारहवाँ, देता खूब प्रचार
निष्कासन के रोग का, बेस्ट यही उपचार ...........
पार्टी जब भी निकाले-निकालो उसके दिवाले
एक बार श्रीमान, बङे ही निपुण होते हैं-कुत्ते मे नेता के ग्यारह गुण होते हैं
पहला गुण है भौंकना,बिना बात हर रोज़
दूजा गुण है काटना, ज़रा लगे जो चोट, ..................
पौपुलर हो जाओगे-सेफ भी रह पाओगे
तीजा गुण है गली में, रहो आप ही शेर
दूजा नेता आये तो, कर दो उसको ढेर ...................
भौंक के उसे डराओ-दौङ के दूर भगाओ
चौथा गुण है झुन्ड का, चमचे रक्खो साथ
मिले कोई कमज़ोर तो, कर लो दो दो हाथ........
ये चमचे वोट दिलायें-ये चमचे नोट भी लायें
लालच गुण है पाँचवाँ, सदा ये देता साथ
बिस्कुट दे जो आप को, चाटो उसके हाथ .....
काम बनता या ना बनता-फिर भी पुचकारे जनता
छठवाँ गुण है दौङना, हर गाङी के संग
भागेंगे दुश्मन सदा, उङ जायेंगे रंग ................
के दुश्मन डर के रहेंगे-के तुमसे बच के रहेंगे
स्वमिभक्ति गुण सातवां, सबसे यही mahaan.
P.M.तक बन जाओगे, इससे तुम श्रीमान.............
ये भक्ति कर जाओगे-बहुत ऊपर जाओगे
डरना है गुण आठवाँ, चढोगे हरेक पहाङ
खटिया के नीचे घुसो, जब भी सुनो दहाङ ...........
अगर ज़िन्दा ना रहोगे-तो आगे कैसे बढोगे
पूंछ हिलाना गुण नवाँ,पङेगी अच्छी छाप
मन का जब महौल हो, पूंछ हिलाओ आप .............
टिकट भी पा जाओगे-समर्थन भी पाओगे
दसवाँ गुण गुर्राइये, जब भी मूड हो औफ
लोग भगेंगे फालतू, भीङ होयेगी साफ ...........
मुफ्त मे काम ना करना-बस अपनी जेबें भरना
पागलपन गुण ग्यारहवाँ, देता खूब प्रचार
निष्कासन के रोग का, बेस्ट यही उपचार ...........
पार्टी जब भी निकाले-निकालो उसके दिवाले
Sunday, December 2, 2007
प्यास
मोती से कुछ अक्षर होंगे
शब्दों का सागर होगा
शब्दों के सागर मे डूबा
छन्दों का गागर होगा
गागर मे गीतों का पानी
मन की प्यास बुझायेगा
ना जाने कब ऐसा पानी
पनिहारा कवि लायेगा
शब्दों का सागर होगा
शब्दों के सागर मे डूबा
छन्दों का गागर होगा
गागर मे गीतों का पानी
मन की प्यास बुझायेगा
ना जाने कब ऐसा पानी
पनिहारा कवि लायेगा
उलझन
जीवन क्यों तुम बीत रहे हो
व्यर्थ अनर्थ सी बातों में
रात सी काली शंकाओं मे
भाग्य अभाग्य के खातों मे
कल था निर्धन आज धनी मैं
कल का धनी अब निर्धन क्यों हूं
ये रिश्ता है वो रिश्ता है
रिश्तों मे बंध जाता क्यों हूं
अति तनाव के वो क्षण काले
आत्मा तक मे लगते छाले
लेकिन जिनसे तनाव बढता
उनसे ही क्यों लगाव बढता???????
कर्तव्यों मे घिरा हुआ सा
मुक्ति की आशा क्यों करता मै
सबसे निर्भय दिखने वाला
अपने आप से क्यों डरता मै
जीवन भर का जोङ घटाना
शून्य साथ मे ले कर जाना
फिर भी जीवन गणित ना समझा
जाने किन पन्नों मे उलझा
उलझन उलझन उलझन उलझन
जीवन क्या तुम उलझन ही हो
या फिर चिन्ताओं मे डूबे
थके हुए टूटे मन ही हो
अगर तुम्हें कुछ पता लगे तो
तुम ही आ कर के बतलाना
जीवन क्या है-जीवन क्यूं है
जीवन क्योंकर बीत रहा है
व्यर्थ अनर्थ सी बातों में
रात सी काली शंकाओं मे
भाग्य अभाग्य के खातों मे
कल था निर्धन आज धनी मैं
कल का धनी अब निर्धन क्यों हूं
ये रिश्ता है वो रिश्ता है
रिश्तों मे बंध जाता क्यों हूं
अति तनाव के वो क्षण काले
आत्मा तक मे लगते छाले
लेकिन जिनसे तनाव बढता
उनसे ही क्यों लगाव बढता???????
कर्तव्यों मे घिरा हुआ सा
मुक्ति की आशा क्यों करता मै
सबसे निर्भय दिखने वाला
अपने आप से क्यों डरता मै
जीवन भर का जोङ घटाना
शून्य साथ मे ले कर जाना
फिर भी जीवन गणित ना समझा
जाने किन पन्नों मे उलझा
उलझन उलझन उलझन उलझन
जीवन क्या तुम उलझन ही हो
या फिर चिन्ताओं मे डूबे
थके हुए टूटे मन ही हो
अगर तुम्हें कुछ पता लगे तो
तुम ही आ कर के बतलाना
जीवन क्या है-जीवन क्यूं है
जीवन क्योंकर बीत रहा है
नालायक विध्यार्थी की सरस्वती वन्दना
माता शारदे भवानी, ऐसा वरदान दे दे,
हो जाये जुगाङ कुछ, हर इम्तेहान में
फेल हो गया बङी बेज्जती खराब होगी,
बैठना पङेगा मुझे, पान की दुकान मे
एसएसटी-कम्प्यूटर-जीके-मैथ-आर्ट-इंगलिश
हिन्दी-संस्क्रत-साइंस,कुछ नहीं आता है
शेक्सपियर, अकबर, न्यूटन तो मर गये,
स्कूल भूतों का डेरा नज़र आता है
ऐसा कर दे कमाल, आ जाये कोई भूचाल,
जिसमे केवल स्कूल गिर जाये माँ
ना कोई हताहत हो, ना किसी को चोट लगे,
आन्सरों की शीट, मलबे मे दब जाये माँ
यू नू मैया बैटर के, कितनी है टैंशन,
एक्ज़ामों मे छोरियाँ भी गायब हो जाती हैं
मैसेज ना भेजे कोइ, ना ही मिस्ड काल मारे,
फोन भी करो तो हाय फोन न उठाती हैं
मेरी प्रोबलम जैनुअन है माँ तू ही देख,
माँगता हूं तुझसे मै, यही मुझे वर दे
हर साल खेलूं होली चैन से सुकून से माँ,
अगले बरस से एक्ज़ाम बन्द कर दे
हो जाये जुगाङ कुछ, हर इम्तेहान में
फेल हो गया बङी बेज्जती खराब होगी,
बैठना पङेगा मुझे, पान की दुकान मे
एसएसटी-कम्प्यूटर-जीके-मैथ-आर्ट-इंगलिश
हिन्दी-संस्क्रत-साइंस,कुछ नहीं आता है
शेक्सपियर, अकबर, न्यूटन तो मर गये,
स्कूल भूतों का डेरा नज़र आता है
ऐसा कर दे कमाल, आ जाये कोई भूचाल,
जिसमे केवल स्कूल गिर जाये माँ
ना कोई हताहत हो, ना किसी को चोट लगे,
आन्सरों की शीट, मलबे मे दब जाये माँ
यू नू मैया बैटर के, कितनी है टैंशन,
एक्ज़ामों मे छोरियाँ भी गायब हो जाती हैं
मैसेज ना भेजे कोइ, ना ही मिस्ड काल मारे,
फोन भी करो तो हाय फोन न उठाती हैं
मेरी प्रोबलम जैनुअन है माँ तू ही देख,
माँगता हूं तुझसे मै, यही मुझे वर दे
हर साल खेलूं होली चैन से सुकून से माँ,
अगले बरस से एक्ज़ाम बन्द कर दे
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